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Tuesday, May 19, 2020

ग्रामीण रोजगार का मजबूत साधन: रेशम उत्पादन व्यवसाय

     रेशम केवल एक कपड़ा नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, समृद्धि और रोजगार का प्रतीक है। भारत जैसे देश में रेशम का महत्व आर्थिक और सामाजिक—दोनों स्तरों पर बहुत गहरा है।
रेशम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्राकृतिक, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल होता है। इसकी मांग कभी खत्म नहीं होती—चाहे शादी-विवाह हों, त्योहार हों या फैशन इंडस्ट्री। यही कारण है कि रेशम को लक्ज़री के साथ-साथ स्थायी मूल्य वाला उत्पाद माना जाता है।


   किसान और ग्रामीण युवाओं के लिए रेशम उत्पादन एक कम जोखिम वाला और लाभदायक व्यवसाय है। कम जमीन में भी अच्छी आय संभव है, और सरकार प्रशिक्षण, सब्सिडी व तकनीकी सहायता देकर इसे और आसान बना रही है। खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी भी आसानी से हो सकती है।

    मेरे विचार से, रेशम भविष्य का भी उद्योग है—क्योंकि आज दुनिया प्राकृतिक फाइबर और सस्टेनेबल फैशन की ओर बढ़ रही है। ऐसे में रेशम न केवल परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि नए अवसर भी पैदा करता है।

🌿 1. रेशम उत्पादन (Sericulture) क्या है?

रेशम उत्पादन को सेरीकल्चर कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से ये चरण होते हैं:

शहतूत/अर्जुन/आसन पौधों की खेती
रेशम के कीड़ों का पालन (Silkworm Rearing)
कोया (Cocoon) उत्पादन
रेशम धागा निकालना (Reeling)
बुनाई व विपणन
भारत सरकार रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, सब्सिडी और तकनीकी सहायता देती है।

🏛️ 2. रेशम उत्पादन के लिए प्रमुख सरकारी योजनाएँ

✅ (1) सिल्क समग्र योजना (Silk Samagra Yojana)
यह केंद्र सरकार की मुख्य योजना है, जिसे
👉 केंद्रीय रेशम बोर्ड (Central Silk Board – CSB) लागू करता है।

इस योजना के अंतर्गत क्या सहायता मिलती है?
✔️ मुफ्त/सब्सिडी वाला प्रशिक्षण
✔️ शहतूत पौधे लगाने में सहायता
✔️ रेशम कीट बीज (Silkworm Seed)
✔️ पालन गृह (Rearing House) निर्माण में सब्सिडी
✔️ कोया उत्पादन व रीलिंग मशीन पर अनुदान
✔️ मार्केटिंग सहायता

✅ (2) राज्य रेशम विकास योजनाएँ
हर राज्य की अपनी रेशम योजना होती है, जैसे:
मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना
राज्य सेरीकल्चर मिशन
👉 इनमें केंद्र + राज्य दोनों की सब्सिडी मिलती है।

🎓 3. सरकारी प्रशिक्षण कहाँ और कैसे मिलेगा?

📍 (1) राज्य रेशम विभाग
जिला रेशम कार्यालय
कृषि विभाग / किसान सेवा केंद्र

यहाँ क्या मिलेगा?
7 दिन से 3 महीने तक का प्रशिक्षण
प्रैक्टिकल + थ्योरी
प्रशिक्षण प्रमाण पत्र

📍 (2) केंद्रीय रेशम प्रशिक्षण संस्थान

भारत सरकार के प्रमुख संस्थान:

CSRTI – Central Sericultural Research & Training Institute
CTRTI – Central Tasar Research & Training Institute
CSR&TI (मैसूर, बेरहामपुर, देहरादून आदि)

👉 यहाँ उन्नत तकनीक और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

🐛 4. रेशम उत्पादन की प्रक्रिया (Step by Step)

🟢 Step 1: भूमि और पौधों का चयन

शहतूत रेशम के लिए 1 एकड़ भूमि पर्याप्त
टसर/एरी रेशम के लिए वन आधारित पौधे
सरकार पौध व खेती पर 50–75% सब्सिडी देती है

🟢 Step 2: रेशम कीट पालन गृह बनाना

हवादार, साफ और सुरक्षित कमरा
लागत: ₹1.5–2 लाख
सब्सिडी: 50–70% तक

🟢 Step 3: रेशम कीट बीज प्राप्त करना

सरकारी बीज केंद्रों से
कम कीमत या मुफ्त
गुणवत्ता प्रमाणित बीज

🟢 Step 4: कीट पालन (25–30 दिन)

तापमान: 24–28°C
साफ-सफाई जरूरी
सरकारी अधिकारी नियमित मार्गदर्शन देते हैं

🟢 Step 5: कोया (Cocoon) उत्पादन

1 एकड़ से साल में 3–4 फसल
1 फसल में 70–100 किलो कोया
बिक्री मूल्य: ₹400–700/kg (प्रजाति अनुसार)

🟢 Step 6: रेशम धागा निकालना

रीलिंग मशीन पर 60–80% सब्सिडी
या कोया सीधे सरकारी बाजार में बेच सकते हैं

💰 5. लागत और कमाई (Investment & Income)

🔸 अनुमानित लागत (1 एकड़):
विवरण।                                राशि
पौध रोपण।                        ₹30,000
पालन गृह।                         ₹1,50,000
कीट बीज व अन्य।               ₹20,000
कुल लागत।                        ₹2–2.5 लाख
सरकारी सब्सिडी।                ₹1–1.5 लाख

🔸 कमाई:

सालाना आय:       ₹2.5–4 लाख
अनुभव बढ़ने पर और अधिक

📄 6. आवेदन कैसे करें?

नजदीकी रेशम विभाग / कृषि कार्यालय जाएँ
आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज, बैंक खाता
प्रशिक्षण हेतु आवेदन करें
योजना में पंजीकरण
प्रशिक्षण + सब्सिडी प्राप्त करें

📌 7. रेशम उत्पादन के फायदे

✔️ कम जमीन में अच्छा मुनाफा
✔️ सरकारी सहयोग पूर्ण
✔️ ग्रामीण रोजगार
✔️ महिलाओं और युवाओं के लिए उपयुक्त
✔️ निर्यात की संभावनाएँ

रेशम उत्पादन (Sericulture) की मशीनरी आपको निम्न स्थानों पर मिल सकती है 👇

🏭 1. सरकारी स्रोत (सब्सिडी के साथ)

✅ केंद्रीय रेशम बोर्ड (Central Silk Board – CSB)
सरकार की Silk Samagra योजना के तहत
रीलिंग मशीन, चर्खा, ड्रायर आदि पर 60–80% तक सब्सिडी
संपर्क: नजदीकी राज्य रेशम विभाग कार्यालय

✅ राज्य रेशम विभाग
जिला रेशम कार्यालय में मशीन सप्लायर की सूची मिलती है
कई बार सरकार खुद अधिकृत विक्रेता से मशीन उपलब्ध करवाती है
👉 पहले रेशम विभाग में पंजीकरण करें, फिर सब्सिडी के साथ मशीन खरीदें।

🏢 2. निजी मशीन निर्माता (Direct Purchase)

आप निम्न शहरों में मशीनरी आसानी से पा सकते हैं:

🟢 रामनगर (कर्नाटक) – रेशम मशीन का बड़ा केंद्र
🟢 मैसूर (कर्नाटक)
🟢 सूरत (गुजरात)
🟢 वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
🟢 भागलपुर (बिहार)

यहाँ से आप खरीद सकते हैं:

🔹 सिल्क रीलिंग मशीन
🔹 मल्टीएंड रीलिंग मशीन
🔹 चर्खा मशीन
🔹 कोकून कुकिंग मशीन
🔹 ट्विस्टिंग मशीन

🌐 3. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म

IndiaMART
TradeIndia
MSME Mart

(लेकिन खरीदने से पहले सरकारी विभाग से मशीन की गुणवत्ता की पुष्टि कर लें)

निष्कर्ष

सरकारी सहायता के साथ रेशम उत्पादन एक लाभदायक, सुरक्षित और स्थायी व्यवसाय है। यदि सही प्रशिक्षण और योजनाओं का लाभ लिया जाए, तो कम पूंजी में भी अच्छी आय संभव है।



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